एनसीईआरटी ने आठवीं की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में मुगल काल की समीक्षा की
पुस्तक में 30 हजार हिंदुओं के नरसंहार का जिक्र, अकबर की घोषणा भी शामिल
नई दिल्ली। अब तक स्कूलों की जिन पाठ्यपुस्तकों में मुगल शासक अकबर को सिर्फ महान और सहिष्णु ही बताया जा रहा था, अब उनमें अकबर की क्रूरता भी पढ़ने को मिलेंगी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत आठवीं कक्षा के लिए तैयार की गई सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में मुगल काल की नए सिरे से समीक्षा की गई है। इसमें मुगल शासक अकबर को सहिष्णु के साथ क्रूर भी बताया गया है जिसने 30 हजार हिंदुओं का कत्ल किया था।
एनसीईआरटी के मुताबिक, अभी सिर्फ आठवीं कक्षा के लिए तैयार की गई सामाजिक विज्ञान की पाठयपुस्तक में इतिहास से जुड़े इन शोधपरक तथ्यों को रखा गया है। शैक्षणिक सत्र 2025- 26 से यह पाठ्यपुस्तक बच्चों को मिलेगी। साथ ही इतिहास से जुड़े अन्य भ्रामक पहलुओं को भी स्पष्ट किया जाएगा। अगले शैक्षणिक सत्र तक एनसीईआरटी दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं की पाठ्यपुस्तकों को भी लेकर आने वाली है। माना जा रहा है कि इनमें कुछ ऐसे योद्धाओं व सेनानियों की गाथा पढ़ने को मिलेगी, जिन्हें अब तक इतिहास में जगह नहीं मिली है।
यह भी पढ़ें : आपरेशन सिंदूर के बाद सीआरपीएफ में 20,000 अतिरिक्त जवान होंगे
बहरहाल, एनसीईआरटी की आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में प्रमुख मुगल सम्राटों के चित्रण को एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें अकबर के शासन को क्रूरता एवं सहिष्णुता का मिश्रण बताया गया है। 1568 में चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी के दौरान अकबर द्वारा लगभग 30 हजार लोगों के नरसंहार और महिलाओं व बच्चों को गुलाम बनाने के दिए गए आदेश का उल्लेख किया गया है। अकबर की ओर से दिए गए विजय संदेश का उद्धरण दिया गया है, जिसमें उसने कहा है कि ‘हमने काफिरों के कई किलों और कस्बों पर कब्जा कर लिया है और वहां इस्लाम की स्थापना की है। अपनी रक्तपिपासु तलवार की मदद से हमने उनके मन से कुफ्र के निशान मिटा दिए हैं और उन जगहों पर और पूरे हिंदुस्तान में मंदिरों को नष्ट कर दिया है।
औरंगजेब की क्रूरता सार्वजनिक रही है। उसे गैर-मुस्लिमों की धार्मिक यात्राओं पर जजिया कर लगाने और हिंदू मंदिरों को तोड़ने वाला बताया गया है। एनसीईआरटी ने पुस्तक की प्रस्तावना में ही साफ कहा है कि ‘इन घटनाओं को न तो मिटाया जा सकता है और न ही नकारा जा सकता है, लेकिन आज किसी को भी इनके लिए जिम्मेदार ठहराना गलत होगा।’ ‘भारत के राजनीतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण’ नाम की पाठ्यपुस्तक में 13वीं से 17वीं शताब्दी तक के इतिहास पर चर्चा की गई है। इनमें दिल्ली सल्तनत, विजयनगर साम्राज्य, मुग़लों और सिखों के उत्थान का भी जिक्र किया गया है। बाबर को ‘एक तुर्क मंगोल शासक व सैन्य रणनीतिकार’ बताया गया है। पुस्तक में बताया गया कि कैसे हेमू ने कुछ समय के लिए दिल्ली पर शासन किया था।
यह भी पढ़ें : बीते जमाने के हथियारों से नहीं जीते जा सकते आज के युद्ध : सीडीएस